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CA Mohammed S Chokhawala

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I'm a chartered accountant, well-versed in the ins and outs of income tax, GST, and keeping the books balanced. Numbers are my thing, I can sift through financial statements and tax codes with the best of them. But there's another side to me – a side that thrives on words, not figures. Writing has always been a passion. Maybe it's the desire to explain complex financial concepts in a clear, understandable way, or perhaps it's the joy of crafting a compelling narrative. Whatever the reason, I've recently started putting pen to paper (or rather, fingers to keyboard) and creating articles and blog posts that make the world of finance less intimidating for everyday people.

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The latest articles by CA Mohammed S Chokhawala


బడ్జెట్ 2025 ముఖ్యాంశాలు: PDF డౌన్‌లోడ్, కీలకమైన అంశాలు, ముఖ్యమైన అంశాలు
Updated on Oct 13th, 2026 | 41 min read

భారతదేశ ఆర్థిక వృద్ధికి కొత్త మైలురాయిని ఏర్పరచడానికి నిర్దేశించిన ఎద్దుల బడ్జెట్ 2025, ఫిబ్రవరి 1, 2025న ఆర్థిక మంత్రి నిర్మలా సీతారామన్ తో అందించబడింది. దీని లక్ష్యం పేదలు, యువత, రైతులు మరియి మహిళలను అధికారపరచడం. పన్ను విధానాలు, భూమిగత సదుపాయాలు, వ్యవసాయం మరియు డిజిటలీకరణ ద్వారా దీర్ఘకాలిక స్థిరమైన వృద్ధిని బలపరచడానికి ఈ బడ్జెట్ కీలక రంగాలలో బలమైన సుధారణ చర్యలతో వచ్చింది. బడ్జెట్ 2025 యొక్క ప్రధాన హైలైట్స్ మరియు ముఖ్యమైన అంశాలను తెలుసుకోవడానికి కొనసాగండి.బడ్జెట్ 2025: బడ్జెట్ 2025ని డౌన్‌లోడ్ చేయండిఫైనాన్స్ బిల్లు 2025 డౌన్‌లోడ్ చేసుకోవడానికి లింక్‌పై క్లిక్ చేయండి: ఇక్కడ డౌన్‌లోడ్ చేసుకోండి బడ్జెట్ 2025 ప్రసంగాన్ని డౌన్‌లోడ్ చేయడానికి లింక్‌పై క్లిక్ చేయండి: ఇక్కడ డౌన్‌లోడ్ చేసుకోండి1. ప్రత్యక్ష పన్ను ప్రతిపాదనలుకొత్త పన్ను బిల్లును ప్రవేశపెట్టడం1961లో ఉన్న ఆదాయపు పన్ను చట్టం స్థానంలో కొత్త ఆదాయపు పన్ను బిల్లు వచ్చే వారం ప్రవేశపెట్టబడుతుంది.


Income From Salary – How To Calculate Income Tax On Salary With Example (AY 2026-27)
Updated on Oct 13th, 2026 | 29 min read

Salary income is taxable under the Income Tax Act and includes basic pay, allowances, bonuses, and perquisites received from an employer. Understanding taxable and exempt salary components, available deductions, and applicable tax regimes can help salaried individuals calculate tax liability accurately and maximise tax savings while filing Income Tax Returns.Salary Changes - Income Tax Rules 2026The Income Tax Rules 2026 has introduced massive changes to the exemption limits. This includes children education allowance and hostel allowance which can be claimed as exemption from salary income. What is Salary?Any compensation or benefit received by the employee from his employer falls under the purview of salary. This need not be received in cash. More often than not, non monetary benefits the employee receives forms part of their salary.


Budget 2025 Highlights in Hindi: PDF डाउनलोड करें, प्रमुख घोषणाएँ, आर्थिक नीतियाँ और सभी महत्वपूर्ण अपडेट
Updated on Oct 13th, 2026 | 39 min read

यह बहुप्रतीक्षित केंद्रीय बजट 2025, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी 2025 को प्रस्तुत किया गया, जो भारत की आर्थिक प्रगति के लिए एक नया महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा। यह बजट समग्र विकास पर जोर देता है, जिसका लक्ष्य गरीबों, युवाओं, किसानों और महिलाओं को सशक्त बनाना है। दिर्घकालिक सतत विकास को मजबूत बनाने के लिए, इस बजट में कराधान, इन्फ्रास्ट्रक्चर, कृषि और डिजिटलीकरण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में मजबूत सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। बजट 2025 से प्रमुख हाइलाइट्स और मुख्य निष्कर्षों को जानने के लिए पढ़ें।केंद्रीय बजट 2025 PDF डाउनलोड करेंवित्त विधेयक 2025 डाउनलोड करने के लिए लिंक पर क्लिक करें: Download here बजट 2025 भाषण डाउनलोड करने के लिए लिंक पर क्लिक करें: Download here1. प्रत्यक्ष कर संबंधित प्रस्ताव नये कर विधेयक का परिचयएक नया आयकर बिल अगले सप्ताह पेश किया जाएगा, जिसका उद्देश्य 1961 के मौजूदा आयकर अधिनियम को प्रतिस्थापित करना है। इस बिल का उद्देश्य कर अनुपालन को सरल बनाना और मौजूदा कर कानूनों की जटिलता को 60% तक कम करना है।नई व्यवस्था के तहत कर संरचना में परिवर्तननई कर व्यवस्था के अंतर्गत कर संरचना निम्नानुसार संशोधित की गई है:आयकर स्लैबकर की दररु. 4,00,000 तकशून्यरु. 4,00,001 - रु. 8,00,0005%रु.


Budget 2025 Highlights: PDF Download, Key Takeaways and Important Points
Updated on Oct 13th, 2026 | 54 min read

The much-awaited Union Budget 2025 by Finance Minister Nirmala Sitharaman, was presented on February 1, 2025, which focused on a new landmark for India's economic trajectory to make growth all-inclusive, which is aimed at empowering the poor, the youth, the farmer, and women. In a bid to strengthen long-term sustainable growth through taxation, infrastructure, agriculture, and digitalisation, this budget comes with a strong reform measure in these key sectors. Read on to find out the major highlights and key takeaways from Budget 2025.Budget 2025: Download Budget 2025Click on the link to download Finance Bill 2025: Download here Click on the link to download the Budget 2025 speech: Download here1. Direct Tax ProposalsIntroduction of a New Tax BillA new Income Tax Bill will be introduced in this week, which aims to replace the existing Income Tax Act of 1961. This bill is designed to simplify tax compliance and reduce the complexity of current tax laws by up to 60%.Changes in Tax Structure Under the New RegimeUnder the New tax regime, the tax structure is revised as follows:Income Tax SlabsTax RateUpto Rs.


What is Income Tax? Meaning, Rules, Tax Slabs, Types and Tax Guide FY 2025-26
Updated on Oct 13th, 2026 | 23 min read

Income tax is the most popular direct tax levied by the government. The Central Board of Direct Taxes holds the authority to govern the effective implementation of the levy and collection of income tax in India. For FY 2025-26, they can choose between the old and new tax regimes, which is the most beneficial for them. With effect from 01st April 2026, income earned are assessed under the provisions of Income Tax Act, 2025.Key HighlightsWhile the old regime offers a plethora of deductions, the new regime has relaxed slab rates with limited deductions.Certain income, such as long-term capital gains, sale of crypto assets, betting income, lottery winnings, etc., are taxed at special rates.Income earned from 1st April 2026 are governed under the provisions of Income Tax Act, 2025.What is Income Tax?Income tax precisely means tax levied on the income earned by the assessee during the relevant financial year. Who should pay Income Tax?As per section 2 of the Income Tax Act, 1961, every person who is liable to pay tax or any other sum under this Act is termed the assessee. An assessee can be categorised under the following legal status:IndividualHindu Undivided FamilyAssociation of PersonsBody of IndividualsTrustsPartnership firmsCo-operative societiesCompaniesLocal authorityArtificial Juridical PersonWhat is the Income Tax Act?As per Article 265 of the Indian Constitution, no tax can be levied except under the authority of law.


आयकर – नवीनतम अपडेट, मूल बातें, टैक्स स्लैब, नियम, आयकर गाइड वित्तीय वर्ष 2025-26
Updated on Oct 13th, 2026 | 63 min read

भारत में आयकर एक प्रत्यक्ष कर है, जो व्यक्तियों और संस्थाओं द्वारा अर्जित आय पर लगाया जाता है। यह प्रगतिशील कर संरचना पर आधारित होता है, जिसमें अधिक आय होने पर अधिक कर देना पड़ता है। आयकर की गणना स्लैब दरों के अनुसार की जाती है, जो करदाता की आयु, आवासीय स्थिति और चुनी गई कर व्यवस्था (रेजीम) पर निर्भर करती है।कटौतियाँ और छूट कर देनदारी को कम करने में मदद करती हैं। समय पर आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने से लाभ मिलते हैं और जुर्माने से बचाव होता है।मुख्य बिंदुआयकर (Income Tax) एक प्रत्यक्ष कर है, जो व्यक्तियों और संस्थाओं की आय पर लगाया जाता है और यह प्रगतिशील कर संरचना पर आधारित होता है।आयकर अधिनियम 2025 को 21 अगस्त 2025 को पारित किया गया था। यह 01 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा।आय को 5 प्रमुख शीर्षों के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाता है: वेतन,गृह संपत्ति से आय, व्यवसाय/पेशा, पूंजीगत लाभ, अन्य स्रोत.आयकर क्या है?आयकर, करदाता द्वारा संबंधित वित्तीय वर्ष में अर्जित आय पर लगाया जाता है।आयकर एक प्रत्यक्ष कर माना जाता है, क्योंकि इसका भुगतान करदाता स्वयं करता है और कर का बोझ अप्रत्यक्ष करों की तरह आगे नहीं डाला जा सकता।प्रत्येक करदाता (आयकर अधिनियम में "अस्सेसी" कहा गया है) जो निर्धारित शर्तों को पूरा करता है, उसे कानून द्वारा टैक्स रिटर्न फाइल करना अनिवार्य होता है।टैक्स रिटर्न नहीं भरने पर जुर्माना, ब्याज और कर विभाग द्वारा जाँच की कार्रवाई हो सकती है।भारत में व्यक्तियों के लिए प्रगतिशील कर दर लागू है, यानी करदाता की आय बढ़ने पर कर की दर भी बढ़ती है।आयकर के प्रभाव करदाता के कानूनी इकाई, आयु, आवासीय स्थिति और आय की प्रकृति के आधार पर अलग-अलग होते हैं।भारत में आयकर कानूनभारत का संविधान स्पष्ट रूप से कहता है कि कर केवल किसी कानून के प्रावधानों के तहत ही लगाया जा सकता है। सरकार द्वारा लगाया गया कोई भी कर, जो किसी कानून के अंतर्गत नहीं आता, असंवैधानिक है।भारत में आयकर लगाने और वसूलने से संबंधित सभी नियम आयकर अधिनियम, 1961 द्वारा शासित होते हैं।आयकर संघ सूची के अंतर्गत आता है, जो केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष नियंत्रण वाला क्षेत्र है। केवल संसद के पास आयकर संग्रह के लिए कानून बनाने का अधिकार है।प्रत्येक वर्ष, बजट सत्र के दौरान पेश किए गए वित्त विधेयक के माध्यम से इस अधिनियम में विभिन्न धाराओं को जोड़कर या हटाकर टैक्स अनुपालन में सुधार किया जाता है। इन परिवर्तनों को अधिनियम में संशोधन कहा जाता है।आयकर अधिनियम में संशोधन वित्त अधिनियम के माध्यम से लागू किए जाते हैं।आयकर अधिनियम के अलावा, आयकर कानून के अन्य घटकों में आयकर नियम, परिपत्र, अधिसूचनाएँ और न्यायिक निर्णय शामिल हैं। ये सभी आयकर कानून के कार्यान्वयन और कर संग्रह में मदद करते हैं।आयकर विभागआयकर विभाग एक सरकारी संस्था है।आयकर अधिनियम, आयकर विभाग को भारत सरकार की ओर से प्रत्यक्ष कर वसूलने का अधिकार देता है।वित्त मंत्रालय भारत सरकार के राजस्व संबंधी कार्यों का प्रबंधन करता है। वित्त मंत्रालय ने प्रत्यक्ष करों जैसे आयकर आदि के प्रशासन का कार्य केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) को सौंपा है।CBDT, वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग का एक हिस्सा है। CBDT, आयकर विभाग के माध्यम से प्रत्यक्ष कर कानूनों का प्रशासन करता है।करदाताओं के प्रकारआयकर अधिनियम के अनुसार, भारत में प्रत्येक व्यक्ति जिसकी आय कर योग्य है, उसे आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करना होता है।जिस व्यक्ति की आय पर कर लगता है, उसे अस्सेसी कहा जाता है।आयकर अधिनियम ने अस्सेसियों को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया है। अलग-अलग प्रकार के अस्सेसियों पर विभिन्न कर नियम लागू होते हैं।करदाताओं की श्रेणियाँ निम्नलिखित हैं:व्यक्तिहिंदू अविभाजित परिवारफर्मकंपनियाँव्यक्तियों का संघ व्यक्तियों का समूहस्थानीय प्राधिकरणकृत्रिम न्यायिक व्यक्तिकुछ अस्सेसियों को निर्धारित शर्तें पूरी करने पर आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करना अनिवार्य होता है।आवासीय स्थितिएक करदाता की कर योग्य आय का दायरा उसकी आवासीय स्थिति के आधार पर निर्धारित किया जाता है। आवासीय स्थिति के आधार पर करदाताओं को निम्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:निवासी और सामान्यतः निवासी निवासी परंतु सामान्यतः निवासी नहींअनिवासीनिम्नलिखित तालिका विभिन्न प्रकार के करदाताओं की आवासीय स्थिति के आधार पर कर योग्य आय को निर्दिष्ट करती है:आय का प्रकारआवासीय स्थिति निवासी और सामान्यतः निवासीनिवासी परंतु सामान्यतः निवासी नहींअनिवासीभारत में प्राप्त आयकर योग्यकर योग्यकर योग्यभारत में अर्जित आयकर योग्यकर योग्यकर योग्यविदेश से अर्जित आय, लेकिन पेशा या व्यवसाय भारत में हैकर योग्यकर योग्यकर मुक्तविदेश से अर्जित आयकर योग्यकर मुक्तकर मुक्तदेश में लाई गई पूर्व की कर-मुक्त विदेशी आयकर मुक्तकर मुक्तकर मुक्तआय के प्रकार - आय के 5 मुख्य शीर्षक कौन-कौन से हैं?कर गणना के लिए, हमें अपनी सभी प्रकार की आय को अधिनियम के तहत निर्धारित उचित शीर्षकों के अंतर्गत वर्गीकृत करना चाहिए। इस अधिनियम के तहत कर योग्य सभी प्रकार की आय को मुख्य रूप से निम्नलिखित पाँच शीर्षकों में वर्गीकृत किया गया है।आय का शीर्षकशामिल आय की प्रकृतिवेतन से आयवेतन और पेंशन से प्राप्त आय इस शीर्षक के अंतर्गत कर योग्य है।गृह संपत्ति से आयकिसी गृह संपत्ति को किराए पर देने से प्राप्त आय इस शीर्षक के अंतर्गत कर योग्य है।व्यवसाय और पेशे से आयस्वरोजगार करने वाले व्यक्तियों, व्यवसायों, फ्रीलांसर्स या ठेकेदारों द्वारा अर्जित लाभ इस शीर्षक के अंतर्गत आते हैं। जीवन बीमा एजेंटों, चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, डॉक्टरों, और वकीलों जिनका अपना प्रैक्टिस है और ट्यूशन टीचर्स की आय इस शीर्षक के अंतर्गत कर योग्य है।पूंजीगत लाभ से आयम्यूचुअल फंड, शेयर, संपत्ति, ज्वैलरी आदि जैसी पूंजीगत संपत्ति की बिक्री से प्राप्त आय इस शीर्षक के अंतर्गत कर योग्य है।अन्य स्रोतों से आयवह आय जो उपरोक्त 4 शीर्षकों में शामिल नहीं होती है। उदाहरण: बचत खाते पर ब्याज, फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज, लॉटरी जीत आदि।आयकर अधिनियम के तहत कटौतियाँयदि करदाता कुछ निवेश करते हैं या कुछ खर्च वहन करते हैं, तो निवेश या खर्च की राशि को आय में से घटाया जा सकता है और केवल शुद्ध आय पर ही कर लगेगा। इसे कटौती की अवधारणा कहा जाता है।इसके अलावा, यदि अर्जित आय किसी विशिष्ट प्रकृति की है या किसी विशिष्ट स्रोत से प्राप्त हुई है, तो अधिनियम द्वारा ऐसी आय पर सीधे कटौती की अनुमति दी जाती है।अतः, अधिनियम के तहत कटौतियाँ किए गए निवेश, किए गए खर्च या अर्जित आय के आधार पर दी जा सकती हैं। अधिनियम के तहत उपलब्ध कटौतियों के लोकप्रिय रूपों के बारे में अधिक जानने के लिए आगे पढ़ें।लोकप्रिय कटौतियाँएक करदाता पहले से कर योजना बनाकर कर बचत कर सकता है। करदाता कर-बचत उपकरणों में निवेश करके कर योजना कर सकता है। इससे आयकर दायित्व को कम करने में मदद मिलती है।धारा 80C के तहत कटौतियाँआयकर अधिनियम की धारा 80C से 80U तक कुछ व्यय और निवेशों पर कुल आय में से कटौती की अनुमति देती है। धारा 80सी के तहत कटौती प्राप्त करने के लिए कुछ लोकप्रिय निवेश विकल्प निम्नलिखित हैं:लोकप्रिय धारा 80C निवेशविवरणईएलएसएसपीपीएफएनएससी5-वर्षीय कर बचत एफडीएससीएसएसधारा 80C लाभहाँहाँहाँहाँहाँनिवेश का प्रकारइक्विटीनिश्चित आयनिश्चित आयनिश्चित आयनिश्चित आयलॉक-इन अवधि3 वर्ष15 वर्ष5 वर्ष5 वर्ष5 वर्षअधिकतम निवेशकोई सीमा नहीं*₹1.5 लाखकोई सीमा नहीं*₹1.5 लाख₹30 लाख*ईएलएसएस और एनएससी पर निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं है। हालाँकि, धारा 80C के तहत प्रति वित्तीय वर्ष केवल ₹1.5 लाख तक ही संयुक्त कर लाभ प्राप्त होता है।करदाता राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) में योगदान पर धारा 80C के तहत ₹1,50,000 तक की कटौती का दावा कर सकता है।धारा 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त ₹50,000 की कटौती का दावा किया जा सकता है।करदाता नियोक्ता के एनपीएस योगदान पर धारा 80CCD(2) के तहत वेतन के 14% तक की कटौती भी प्राप्त कर सकता है।स्वास्थ्य बीमा और चिकित्सा व्यय पर कटौतीधारा 80C में कटौती के अलावा, करदाता धारा 80D के तहत स्वयं, परिवार और माता-पिता के लिए किए गए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम और चिकित्सा व्यय पर कर लाभ प्राप्त कर सकता है।करदाता और उसके परिवार के लिए ₹25,000 तक की कटौती उपलब्ध है।वरिष्ठ नागरिकों के मामले में ₹50,000 तक की कटौती ली जा सकती है।इस धारा के तहत कटौती केवल निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक मोड (UPI, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग आदि) से भुगतान करने पर ही प्राप्त की जा सकती है।निवारक स्वास्थ्य जांच पर कटौती नकद भुगतान करने पर भी प्राप्त की जा सकती है। धारा 80D के अंतर्गत उपलब्ध अधिकतम कटौती की सीमा को समझने के लिए निम्न तालिका सहायक है:कटौती का दावाअधिकतम कटौती की सीमा (₹)स्वयं व परिवार (₹)माता-पिता (₹)निवारक जांच (₹)कुल कटौती (₹)केवल स्वयं + परिवार25,000-5,00025,000स्वयं + परिवार + माता-पिता25,00025,0005,00050,000स्वयं + परिवार + वरिष्ठ नागरिक माता-पिता25,00050,0005,00075,000वरिष्ठ नागरिक करदाता + वरिष्ठ नागरिक माता-पिता50,00050,0005,0001,00,000इस प्रकार, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि धारा 80D के अंतर्गत अधिकतम ₹1,00,000 तक की कटौती का दावा किया जा सकता है।शिक्षा ऋण पर कटौतीधारा 80E के तहत, करदाता उच्च शिक्षा के लिए लिए गए ऋण पर भुगतान किए गए ब्याज पर कटौती का दावा कर सकता है।इस कटौती की कोई अधिकतम सीमा नहीं है।हालांकि, यह कटौती केवल तभी ली जा सकती है जब ऋण स्वयं, जीवनसाथी या बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए लिया गया हो।होम लोन पर कटौतीधारा 24 के तहत, करदाता होम लोन पर भुगतान किए गए ब्याज पर कटौती का दावा कर सकता है।कटौती की राशि इस बात पर निर्भर करती है कि घर स्व-आवासीय है या किराए पर दिया गया है।धारा 80C के तहत ऋण की मूल राशि पर ₹1.5 लाख तक की अतिरिक्त कटौती भी प्राप्त की जा सकती है।कटौती का आधारपुरानी कर प्रणालीनई कर प्रणालीस्व-स्वामित्व वाली संपत्ति के लिए अधिकतम सीमाकिराए पर दी गई संपत्ति के लिए अधिकतम सीमास्व-स्वामित्व वाली संपत्ति के लिए अधिकतम सीमाकिराए पर दी गई संपत्ति के लिए अधिकतम सीमास्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन + मूलधनधारा 80C की कुल सीमा ₹1,50,000 के भीतरधारा 80C की कुल सीमा ₹1,50,000 के भीतरकोई कटौती नहींकोई कटौती नहींधारा 24 के तहत गृह ऋण पर ब्याज की कटौती  ₹2 लाखकोई अधिकतम सीमा नहीं (लेकिन किराया आय ITR में दिखाना अनिवार्य); अधिकतम हाउस प्रॉपर्टी लॉस ₹2 लाख तककोई कटौती नहींकोई सीमा नहीं (लेकिन ITR में किराया आय दिखाना आवश्यक है)पहली बार घर खरीदने पर कटौती – धारा 80EE (*कुछ शर्तें लागू)₹50,000–कोई कटौती नहींकोई कटौती नहींब्याज आय पर कटौतीकरदाता आयकर अधिनियम की धारा 80TTA के तहत बैंकों में बचत जमा पर प्राप्त ब्याज पर कटौती का दावा कर सकता है। व्यक्ति इस धारा के तहत ₹10,000 तक की कटौती प्राप्त कर सकते हैं।वरिष्ठ नागरिकों के लिए धारा 80TTB के तहत ₹50,000 तक की कटौती प्रदान की जा सकती है।आय की गणनासभी पाँच शीर्षकों (वेतन, गृह संपत्ति, पूंजीगत लाभ, व्यवसाय या पेशा, तथा अन्य स्रोत) से प्राप्त आय, छूट, कटौतियाँ, रिबेट, हानियों की भरपाई आदि को ध्यान में रखकर कर योग्य आय की गणना करने की प्रक्रिया को आय की गणना कहा जाता है। आय की गणना के बाद, करदाता आयकर अधिनियम के अनुसार अपनी आयकर दायित्व की गणना कर सकता है।यहाँ एक संक्षिप्त दिशानिर्देश दिया गया है जिसे आप अपनी आय पर देय कर की गणना के लिए अनुसरण कर सकते हैं:अपनी सभी आय को सूचीबद्ध करें - चाहे वह वेतन, किराया आय, पूंजीगत लाभ, ब्याज आय या अपने व्यवसाय या पेशे से लाभ हो।ऐसी आय को बाहर कर दें जो अधिनियम के तहत छूट प्राप्त हैं।आय के प्रत्येक शीर्षक के तहत उपलब्ध सभी लागू कटौतियों और छूटों का दावा करें। उदाहरण के लिए, वेतन आय से ₹50,000 का मानक कटौती, किराया आय से नगरपालिका कर, व्यवसाय के टर्नओवर से व्यवसाय से संबंधित व्यय आदि का दावा करें।अपनी कुल आय से लागू कटौतियों का दावा करें, जैसे धारा 80 की कटौतियाँ जैसे 80C, 80D, 80TTA, 80TTB आदि।कृपया ध्यान दें कि कटौतियाँ और छूट अलग-अलग हैं हालाँकि ये समान लगते हैं। छूट को करदाता की आय की गणना में बिल्कुल नहीं माना जाता है। जबकि कटौती में, इसे पहले आय में जोड़ा जाता है और आय की गणना में कटौती के रूप में दिखाया जाता है।अब आप अपनी कर योग्य आय पर पहुँच जाएंगे।जिस कर स्लैब में आप आते हैं उसे जाँचें और तदनुसार अपने आयकर की गणना करें।जहाँ लागू हो, धारा 87A के तहत रिबेट की गणना करें और इसे आयकर से घटा दें।रिबेट के बाद देय कर पर 4% सेस की गणना करें।पहले से भुगतान किए गए कर - जैसे TDS, अग्रिम कर आदि, को देय शुद्ध कर से घटाया जा सकता है ताकि देय शेष कर की गणना की जा सके।सरकार कर स्लैब, योजनाओं और कर लाभों को लागू और परिवर्तित करती रहती है, इसलिए बजट के साथ अपडेट रहना एक अच्छा विचार है। आयकर की गणना के लिए कृपया आयकर कैलकुलेटर देखें।कर की गणनाकर स्लैबकर दायित्व की गणना स्लैब दरों के आधार पर की जाती है। आय बढ़ने के साथ कर स्लैब दरें बढ़ती हैं।एक सीढ़ी की कल्पना करें, यह एक बिंदु पर बढ़ती है और एक निश्चित बिंदु तक सपाट रहती है, और फिर से बढ़ जाती है। स्लैब दरें भी ऐसी ही होती हैं।एक निश्चित सीमा तक आय पर कर दरें निश्चित होती हैं, और आय के उस सीमा को पार करने के बाद यह बढ़ जाती हैं। इसे प्रगतिशील कराधान भी कहा जाता है।व्यक्तियों और HUF के लिए कर की गणना मुख्य रूप से स्लैब दरों पर की जाती है। कंपनियों और ट्रस्टों जैसे करदाताओं के लिए कर की गणना एक सपाट दर पर की जाती है।पुरानी आयकर व्यवस्था क्या है?60 वर्ष से कम आयु के व्यक्तिगत करदाताओं के लिए पुरानी कर व्यवस्था के तहत लागू कर स्लैब दरें निम्नलिखित हैं:आय सीमाकर दरदेय कर₹2.5 लाख तक0कोई कर नहीं₹2.5 लाख - ₹5 लाख5%आय का 5%₹5 लाख - ₹10 लाख20%₹12,500 + ₹5 लाख से अधिक आय पर 20%₹10 लाख से अधिक30%₹1,12,500 + ₹10 लाख से अधिक आय पर 30%नोट:पुरानी कर व्यवस्था के तहत निम्नलिखित लोकप्रिय कटौतियाँ उपलब्ध हैं:LTC (लीव ट्रैवल कंसेसन), HRA (हाउस रेंट अलाउंस), और अन्य विशिष्ट भत्तों पर कटौती।धारा 80C (LIC, PPF, NPS आदि) से 80U तक कर-बचत निवेश पर कटौती।वेतन पर ₹50,000 का मानक कटौती।होम लोन पर भुगतान किए गए ब्याज पर कटौती।60 वर्ष और उससे अधिक आयु वालों तथा 80 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए दो अन्य कर स्लैब हैं।कई लोग यह गलत समझते हैं कि यदि कोई ₹12 लाख कमाता है, तो उसे ₹12 लाख पर 30% कर (₹3,60,000) देना होगा। यह गलत है। कर स्लैब-वार देना होता है। प्रगतिशील कर प्रणाली में ₹12 लाख कमाने वाले व्यक्ति को ₹1,12,500 + ₹60,000 = ₹1,72,500 कर देना होगा।नई कर व्यवस्था क्या है?नई कर व्यवस्था को व्यक्तियों और HUF पर अनुपालन बोझ को कम करने के उद्देश्य से लागू किया गया था। इसमें कर दरों और कर कटौतियों को एक साथ कम किया गया। अब व्यक्तियों को अपने कर को कम करने के लिए विभिन्न कर-बचत निवेश करने और उनका दस्तावेजीकरण करने की आवश्यकता नहीं है।बजट 2023 में करदाताओं को नई कर व्यवस्था अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु, इसे डिफॉल्ट व्यवस्था बना दिया गया। FY 2024-25 (AY 2025-26) के लिए नई कर व्यवस्था के तहत आयकर स्लैब इस प्रकार हैं:आयकर स्लैबआयकर दर₹3 लाख तक0%₹3 लाख - ₹7 लाख5%₹7 लाख - ₹10 लाख10%₹10 लाख - ₹12 लाख15%₹12 लाख - ₹15 लाख20%₹15 लाख से अधिक30%बजट 2025 में, कर अनुपालन को सरल बनाने और करदाताओं के हाथों में कर बचत बढ़ाने के लिए नई कर व्यवस्था के तहत कर स्लैब को संशोधित किया गया। FY 2025-26 से संशोधित कर स्लैब निम्नलिखित हैं:आयकर स्लैबआयकर दर₹4 लाख तक0%₹4 लाख - ₹8 लाख5%₹8 लाख - ₹12 लाख10%₹12 लाख - ₹16 लाख15%₹16 लाख - ₹20 लाख20%₹20 लाख - ₹24 लाख25%₹24 लाख से अधिक30%यदि करदाता नई कर प्रणाली का विकल्प चुनते हैं तो अधिकांश कटौतियाँ और छूट मान्य नहीं होती हैं। हालाँकि, नई प्रणाली के अंतर्गत कुछ छूटें और कटौतियाँ उपलब्ध हैं:दिव्यांग व्यक्ति के लिए परिवहन भत्ता।नौकरी के तहत आने-जाने के खर्च के लिए प्राप्त कन्वेन्स भत्ता।दौरे या स्थानांतरण के लिए यात्रा व्यय की भरपाई हेतु प्राप्त मुआवजा।नियमित कार्य स्थल से अनुपस्थिति के कारण उत्पन्न होने वाले सामान्य खर्चों की पूर्ति के लिए प्राप्त दैनिक भत्ता।नई कर प्रणाली के अंतर्गत ₹5 करोड़ से अधिक कमाने वालों के लिए अधिकतम सरचार्ज 37% से घटाकर 25% कर दिया गया है। इससे उनकी कुल कर दर 42.74% से घटकर 39% हो गई है। नई कर प्रणाली में वेतन पर स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000 है (पुरानी प्रणाली में ₹50,000)। पेंशन योजना में नियोक्ता के योगदान पर कटौती वेतन का 14% है (पुरानी प्रणाली में 10%)। पारिवारिक पेंशन पर अधिकतम कटौती ₹25,000 है (पुरानी प्रणाली में ₹15,000)।इक्विटी शेयर, इक्विटी आधारित यूनिट्स या बिज़नेस ट्रस्ट यूनिट्स के स्थानांतरण पर दी जाने वाली लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन छूट की सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹1.25 लाख प्रति वर्ष कर दी गई है।विशेष कर दरेंयह याद रखना महत्वपूर्ण है कि सभी आय पर स्लैब के आधार पर कर नहीं लगाया जा सकता। कुछ आय पर निश्चित विशेष दरों से कर लगता है।पूंजीगत लाभ आय: पूंजीगत लाभ पर कर आपकी संपत्ति और उसे रखने की अवधि पर निर्भर करता है। होल्डिंग पीरियड यह निर्धारित करेगा कि संपत्ति दीर्घकालिक है या अल्पकालिक। दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 12.5% की दर से कर लगता है और अल्पकालिक पूंजीगत लाभ पर 20% की सपाट दर से कर लगता है। आकस्मिक आय: लॉटरी, बेटिंग और जुए से प्राप्त जीत जैसी आकस्मिक आय पर 30% की सपाट दर से कर लगता है।नीचे दी गई तालिका यह स्पष्ट करती है कि पूंजीगत संपत्ति को लॉन्ग-टर्म या शॉर्ट-टर्म कैसे वर्गीकृत किया जाता है:संपत्तिअल्पकालिक पूंजीगत संपत्तिदीर्घकालिक पूंजीगत संपत्तिमान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध प्रतिभूतियाँ, यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया की यूनिट्स, इक्विटी-उन्मुख फंड की यूनिट्स, जीरो-कूपन बॉन्ड्स≤ 12 महीने> 12 महीनेअन्य संपत्तियाँ≤ 24 महीने> 24 महीनेधारा 87A के तहत रिबेट और सेसधारा 87A के तहत रिबेट करदाताओं को उनकी आयकर दायित्व को कम करने की अनुमति देता है। यदि आप एक निवासी व्यक्ति हैं और अध्याय VI-A की कटौतियों (धारा 80C, 80D, 80U आदि) को घटाने के बाद आपकी कुल आय एक निश्चित सीमा से अधिक नहीं है, तो आप कर रिबेट का दावा कर सकते हैं। रिबेट पुरानी और नई कर व्यवस्था के लिए अलग-अलग है।पुरानी कर व्यवस्था:यदि कटौतियों को घटाने के बाद आय एक वित्तीय वर्ष में ₹5 लाख तक है, तो अधिकतम ₹12,500 का रिबेट अनुमन्य है।इसका अर्थ है कि यदि आपका कुल देय कर ₹12,500 से कम है, तो आपको कोई कर नहीं देना होगा।नई कर व्यवस्था:यदि कटौतियों को घटाने के बाद आय एक वित्तीय वर्ष में ₹7 लाख तक है, तो अधिकतम ₹25,000 का रिबेट अनुमन्य है।इसका अर्थ है कि यदि आपका कुल देय कर ₹25,000 से कम है, तो आपको कोई कर नहीं देना होगा।यदि कुल आय ₹7,00,000 से थोड़ी अधिक है, तो भी लाभ उपलब्ध है।बजट 2025 में, नई कर व्यवस्था चुनने वाले करदाताओं के लिए रिबेट सीमा ₹25,000 से बढ़ाकर ₹60,000 कर दी गई थी। इसका अर्थ है कि ₹12 लाख तक की कुल आय वाले करदाता कर-मुक्त आय का लाभ उठाएंगे। यह वित्तीय वर्ष 2025-26 से लागू होगा।सभी मामलों में, स्वास्थ्य और शिक्षा सेस की गणना रिबेट के बाद गणना किए गए आयकर के 4% पर की जाती है।आयकर भुगतानआमतौर पर, आयकर रिटर्न दाखिल करते समय एकत्र किया जाता है। लेकिन सरकार अनुपालन न होने से रोकने और अधिक कर राजस्व उत्पन्न करने के लिए रिटर्न दाखिल करने से पहले भी कर एकत्र करती है। कर संग्रह के विभिन्न तरीके नीचे वर्णित हैं।स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस)कुछ भुगतानों के लिए, भुगतान करने वाले व्यक्ति द्वारा स्रोत पर ही कर काटा जाता है। भुगतानकर्ता कर काटेगा और करदाता की ओर से सरकार को जमा करेगा। संक्षेप में, टीडीएस इसी प्रकार कार्य करता है।चूंकि कर पहले ही टीडीएस के रूप में भुगतान किया जा चुका है, करदाता भुगतानकर्ता द्वारा पहले से काटे गए टीडीएस का क्रेडिट दावा कर सकता है। यह क्रेडिट आईटीआर दाखिल करते समय दावा किया जा सकता है।अग्रिम करजब करदाता की वर्ष के लिए अनुमानित आयकर दायित्व ₹10,000 से अधिक हो, तो उसे अग्रिम कर का भुगतान करना होगा।सरकार ने अग्रिम कर किस्तों के भुगतान के लिए नियत तिथियां निर्धारित की हैं।स्व-निर्धारण करयह वह शेष कर है जो करदाता को निर्धारित आय पर देना होता है। स्व-निर्धारण कर की गणना निर्धारित आय पर गणना किए गए कुल आयकर से अग्रिम कर और टीडीएस को घटाकर की जाती है।करों का ई-भुगतानकरदाता ई-फाइलिंग वेबसाइट से अग्रिम कर और स्व-निर्धारण कर ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं।रिफंडरिफंड तब उत्पन्न होता है जब पहले से भुगतान किया गया कर कुल कर दायित्व से अधिक होता है।पहले से भुगतान किया गया कर अग्रिम कर, टीडीएस या अतिरिक्त स्व-निर्धारण कर के रूप में हो सकता है।अधिक भुगतान किया गया कर करदाता के बैंक खाते में जमा कर दिया जाएगा।महत्वपूर्ण शब्दवित्तीय वर्षवित्तीय वर्ष एक वर्ष की अवधि है जिसका उपयोग करदाता लेखांकन और वित्तीय रिपोर्टिंग उद्देश्यों के लिए करते हैं।आयकर अधिनियम के अनुसार, ऐसी अवधि 1 अप्रैल से शुरू होकर अगले कैलेंडर वर्ष की 31 मार्च तक होती है। इसे "FY" के रूप में संक्षिप्त किया जाता है।उदाहरण के लिए, 1 अप्रैल 2024 से शुरू होकर 31 मार्च 2025 तक के वित्तीय वर्ष को FY 2024-25 लिखा जा सकता है।निर्धारण वर्षवित्तीय वर्ष के तुरंत बाद 1 अप्रैल से 31 मार्च तक की एक वर्ष की अवधि को निर्धारण वर्ष कहा जाता है।यह वह अवधि है जिसमें करदाता की आय पर कर की गणना की जाती है।उदाहरण के लिए, FY 2024-25 के दौरान अर्जित आय के लिए, निर्धारण वर्ष AY 2025-26 होगा।पैनपैन स्थायी खाता संख्या का संक्षिप्त रूप है।यह आयकर विभाग द्वारा भारतीय करदाताओं को जारी किया जाने वाला एक अद्वितीय 10-अंकीय अल्फ़ान्यूमेरिक नंबर है।एक व्यक्ति के सभी कर-संबंधी लेनदेन और जानकारी उनके अद्वितीय स्थायी खाता संख्या के विरुद्ध दर्ज की जाती है।जब व्यक्ति को अग्रिम कर या स्व-निर्धारण कर का भुगतान करना होता है, तो उन्हें पैन नंबर का उल्लेख करना होगा।जब करदाता की आय पर टीडीएस कटौती लागू होती है, तो उसे भुगतानकर्ता को अपना पैन भी प्रदान करना चाहिए।बैंकों जैसी संस्थाओं द्वारा सभी महत्वपूर्ण वित्तीय लेनदेन के लिए पैन कैप्चर किया जाता है। इस प्रकार आयकर विभाग एक व्यक्ति द्वारा किए गए लेनदेन को कैप्चर करता है।टैनटैन टैक्स डिडक्शन एंड कलेक्शन अकाउंट नंबर का संक्षिप्त रूप है।यह भारत के आयकर विभाग द्वारा आवंटित एक अद्वितीय 10-अंकीय अल्फ़ान्यूमेरिक नंबर है।कर कटौती (टीडीएस) या कर संग्रह (टीसीएस) के लिए जिम्मेदार सभी व्यक्तियों को टैन प्राप्त करना आवश्यक है। टीडीएस/टीसीएस रिटर्न, किसी भी टीडीएस/टीसीएस भुगतान चालान और टीडीएस/टीसीएस प्रमाणपत्रों में टैन उद्धृत करना अनिवार्य है।आयकर रिटर्न दाखिल करनाप्रत्येक व्यक्ति जिसकी आय कर योग्य है, उसे ऑनलाइन मोड में आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करना चाहिए।ITR का अर्थकरदाता को प्रत्येक वर्ष आयकर विभाग द्वारा निर्धारित ITR फॉर्म के माध्यम से आयकर रिटर्न दाखिल करना होता है।सरकार ने सात ITR फॉर्म निर्धारित किए हैं, जिनके माध्यम से करदाता अपना आयकर रिटर्न दाखिल कर सकता है।करदाता को उचित ITR फॉर्म का चयन करके अपना आयकर रिटर्न दाखिल करना होता है।आयकर फॉर्म सूचीITR-1: वे व्यक्ति (निवासी) जिनकी आय वेतन, एक आवासीय संपत्ति, अन्य स्रोतों से हो, कृषि आय ₹5,000 से कम हो, और कुल आय ₹50 लाख तक हो।ITR-2: वे व्यक्ति/HUF जिनकी कोई व्यवसाय या पेशा नहीं है, और एक से अधिक आवासीय संपत्ति है।ITR-3: वे व्यक्ति/HUF जिनकी आय प्रोप्राइटर व्यवसाय या पेशे से है, या साझेदारी फर्म में भागीदार के रूप में आय है।ITR-4: वे व्यक्ति/HUF जिनकी आय प्रिज़म्प्टिव स्कीम के अंतर्गत व्यवसाय या पेशे से है, और एक आवासीय संपत्ति है।ITR-5: साझेदारी फर्म या LLPs।ITR-6: कंपनियाँ।ITR-7: ट्रस्ट्स।ITR दाखिल करने के लिए आवश्यक दस्तावेज़रिटर्न दाखिल करने से पहले निम्नलिखित जानकारी/दस्तावेज़ तैयार रखें:फॉर्म 16फॉर्म 26ASवार्षिक सूचना विवरण (AIS)करदाता सूचना विवरण (TIS)फॉर्म 16Aकर बचत निवेश के प्रमाणबैंक खाता विवरणआपकी आय के स्रोत के अनुसार आवश्यक दस्तावेज़ों में भिन्नता हो सकती है।जिन्हें ITR दाखिल करने की आवश्यकता नहींहर व्यक्ति जिसकी आय कर योग्य है, उसे ITR दाखिल करना चाहिए। हालांकि, निम्नलिखित स्थितियों में ITR दाखिल करना आवश्यक नहीं है:75 वर्ष या अधिक आयु के करदाता जो निम्न शर्तें पूरी करते हैं:कुल आय केवल पेंशन और ब्याज आय से है। ब्याज आय उसी बैंक से होनी चाहिए जहाँ पेंशन मिलती है।बैंक को घोषणा प्रस्तुत की गई है।बैंक द्वारा धारा 194P के तहत TDS काटा गया है।कर योग्य आय मूल छूट सीमा से कम होने पर:पुरानी व्यवस्था:60 वर्ष से कम: ₹2,50,00060-80 वर्ष: ₹3,00,00080 वर्ष से अधिक: ₹5,00,000नई व्यवस्था: सभी के लिए ₹3,00,000नोट: आयु की गणना वित्तीय वर्ष की 31 मार्च तक की जाती है।ITR न दाखिल करने के परिणामअधिकांश व्यक्तिगत करदाताओं के लिए ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। यदि समय पर दाखिल नहीं किया जाता, तो निम्न हानियाँ हो सकती हैं:भविष्य में हानियों (गृह संपत्ति की हानि को छोड़कर) को आगे ले जाने से वंचित किया जाएगा।रिफंड प्रक्रिया में देरी।होम लोन लेने में कठिनाई।धारा 234F के तहत ₹5,000 (यदि आय ₹5 लाख से अधिक) या ₹1,000 (यदि आय ₹5 लाख से कम) का विलंब शुल्क।पुरानी कर व्यवस्था के तहत रिटर्न दाखिल करने की अनुमति नहीं।यदि 31 जुलाई तक कर बकाया है, तो धारा 234A के तहत ब्याज लगेगा।ITR ऑनलाइन दाखिल करने के बाद, उसे या तो ई-सत्यापित (e-verify) करना होगा या ITR-V का प्रिंट निकालकर CPC, बेंगलुरु भेजना होगा। यदि पहली बार ई-फाइलिंग कर रहे हैं तो प्रक्रिया थोड़ी अलग हो सकती है।ई-फाइलिंगकरदाता को आयकर रिटर्न आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से दाखिल करना होता है। इसके लिए करदाता को www.incometax.gov.in पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके बाद लॉगिन करके ITR दाखिल किया जा सकता है। अब ITR की हार्ड कॉपी भेजने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आयकर विभाग ई-वेरिफिकेशन के कई विकल्प प्रदान करता है जिससे ITR प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है।ITR-V क्या है?ITR-V एक वेरिफिकेशन फॉर्म होता है जो ITR दाखिल करने के बाद जनरेट होता है। इसे या तो ऑनलाइन ई-वेरिफाई करना होता है या फिर इसे निम्नलिखित पते पर भेजना होता है:Income Tax Department – CPC, Post Box No – 1, Electronic City Post Office, Bangalore – 560100, Karnataka. ITR की प्रोसेसिंग केवल तभी होती है जब उसका वेरिफिकेशन पूरा हो जाता है।क्या आपने इस वर्ष का टैक्स रिटर्न ई-फाइल किया?आप ClearTax पर अपना आयकर रिटर्न (ITR) ई-फाइल कर सकते हैं। यहाँ तक कि अगर आपको करों के बारे में कुछ भी ज्ञान नहीं है, तो भी हम आपको चरण-दर-चरण मार्गदर्शन देंगे और ई-फाइलिंग में मदद करेंगे। ClearTax आपको सभी लागू कटौतियों का दावा करने में भी सहायता करता है, ताकि आप कोई भी कर बचत अवसर न छोड़ें।.


Capital Gains for Beginners
Updated on Oct 13th, 2026 | 12 min read

Assets like stocks, bonds, property, mutual fund units, property etc., are great investment options that generate capital gains when sold/redeemed. Thus, they are called capital assets, and the profits generated from their sale are liable for taxation under the head capital gains.  What is Capital Gains Tax?As mentioned above, when you gain profits from the sale of capital assets, there are tax implications. This is called capital gains tax. Now, based on the holding period of the assets, there can be two types of applicable capital gains tax:Short-term capital gains tax orLong-term capital gains taxShort-Term Capital Gains TaxWhen you sell your capital assets after holding them for a period of less than or equal to 24 months, it would be considered a short-term asset. Thus, profits from its sale are liable for short-term capital gains (STCG) tax.


Taxability of Sale of Land or Building – Section 50C of Income Tax Act
Updated on Oct 13th, 2026 | 14 min read

Due to India's large population, the demand for real estate consistently remains high and often exceeds supply. This imbalance, along with the growing aspiration to own property drives up real estate prices over time. Owing to which sellers typically realize substantial gains, which are generally subject to taxation. What is Capital Gain?The income tax law has broadly classified incomes into 5 different categories for taxation purposes. One of the categories is ‘Capital Gains’.Capital Gain is the profit received on the sale of any capital asset, like shares, bonds, jewellery, land or building by the seller. So, any gain on the sale of these capital assets attracts a capital gain tax in the hands of the seller.Sale consideration reduced by the cost of acquisition (indexed cost of acquisition for land or building held for more than 24 months) is taxable as a capital gain.Let’s discuss about the sale of capital assets like land or buildings here:When capital assets like land or building are sold, the capital gain can be calculated as follows:Capital gain =  Sale consideration- cost of acquisitionIf the land or building has been held for more than two years, the cost of acquisition is also adjusted for indexation, which takes account of inflation.


Sukanya Samriddhi Yojana (SSY) 2026: 8.2% Interest Rate, Post Office Account, Eligibility & Tax-Free Benefits
Updated on Oct 13th, 2026 | 27 min read

Sukanya Samriddhi Yojana (SSY) is a savings scheme curated specially for securing the financial future of a girl child. With a competitive interest rate of 8.2%, investments in this scheme qualifies for deduction under Section 80C of the Income Tax Act, 1961, on satisfaction of certain conditions.Sukanya Samriddhi Yojana at a GlanceParticularsDetailsInterest RateLatest interest rate of 8.2% per annumInvestment LimitRs. 250 minimum and Rs. 1.5 lakh maximum per financial yearTenureDeposit for 15 years; account matures after 21 yearsTax BenefitsEligible for tax deduction and tax-free maturityWhere to OpenPost Office or authorised banksSukanya Samriddhi Yojana CalculatorUse the Sukanya Samriddhi Yojana (SSY) Calculator to accurately calculate the returns under this scheme.Latest SSY Interest RateThe Sukanya Samriddhi Yojana (SSY) currently an interest rate of 8.2% p.a., as notified by the Government for the latest quarter.What is Sukanya Samriddhi Yojana?The Sukanya Samriddhi Yojana (SSY) is a government-backed small savings scheme under the Beti Bachao, Beti Padhao initiative. It is designed to help parents build a corpus for their daughter's higher education and marriage.


Section 28 of Income Tax Act-Income Chargeable Under PGBP
Updated on Oct 12th, 2026 | 9 min read

Section 28 of the Income-tax Act,1961 is regarded as one of the most significant provisions in the Indian tax law pertaining to “Profits and Gains of Business & Profession’’(PGBP). The section outlines the opportunity for income from a business/profession and its taxability. Let’s go through the meaning, purpose, types of income covered, and other key details of section 28 of the Income Tax Act.What is section 28 of the Income Tax Act?Section 28 of the Income Tax Act,1961 outlines the taxation rules regarding income generated from professional activities or business operations. It defines the scope of income classified under "Profits and Gains of Business & Profession".This section encompasses various sources of income arising from professional engagements or business endeavours. These include revenue from the sale of goods or services, interest earned on capital, and remuneration such as salaries, commissions, or bonuses received by partners of a partnership firm.Additionally, it encompasses other receipts deemed to be profits and gains from business or profession, such as insurance claims for stock-related profit or loss and compensation for the cessation of employment duties.Purpose of Section 28This particular section of the Income Tax Act sets out various sources of income and dealings falling within the ambit of “Profits and gains of business or profession”.


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Efiling Income Tax Returns(ITR) is made easy with Clear platform. Just upload your form 16, claim your deductions and get your acknowledgment number online. You can efile income tax return on your income from salary, house property, capital gains, business & profession and income from other sources. Further you can also file TDS returns, generate Form-16, use our Tax Calculator software, claim HRA, check refund status and generate rent receipts for Income Tax Filing.

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